September 23, 2026

योग शब्द – वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों में व्यवहार में आया है : बिंदल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने नहान विधानसभा क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम में भाग लिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने समस्त प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा योग शब्द – वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों में अति प्राचीन काल से व्यवहार में आया है। भारतीय दर्शन में योग एक अति महत्वपूर्ण शब्द है। आत्म दर्शन एवं समाधि से लेकर कर्मक्षेत्र तक योग का व्यापक व्यवहार हमारे शास्त्रों में हुआ है।
ऋषि-मुनियों ने योग की अलग-अलग प्रकार से व्याख्या की है जो अनंत है। हजारों-लाखों पीएचडी योग पर हो सकती हैं परंतु हमें अष्टांग योग को धारण करने से अपना सामान्य जीवन व्यतीत करते हुए जीवन का कल्याण कर सकते हैं।
अष्टांग योग – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि। इनमें से हम दो विषयों पर ही जन सामान्य चर्चा-वार्ता करते हैं। वह है, आसन एवं प्राणायाम।
आसन एवं प्राणायाम से हमारे शरीर के हर हिस्से में सही प्रकार से रक्त का संचार होता है। शने: शने: हमारी मांसपेशियां, सनायु एवं तंतु सभी सक्रिय होकर शरीर से दोषों का निर्हरण करते हुए शरीर दोषमुक्त होने लगता है। मांसपेशियों का संकुच्चन एवं प्रसारण होने से रक्त संचार पूर्णरूपेण होता है।

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